घाटी के युवाओं को आतंकी रास्ते से बचाने की कोशिशें जारी, 2020 में इतनी कामयाबी

2 weeks ago 16
जम्मू-कश्मीर

जब भी कोई युवा लापता होता है, तो परिवार वाले पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराते हैं. फिर सुरक्षा एजेंसियां ​​उन्हें वापस लाने के लिए उनकी पड़ताल करतीं हैं. अगर ये पहले ही आतंकी संगठन में शामिल हो गए हैं, तो फिर सुरक्षाबल इनके परिवारों से संपर्क करके उनसे आतंकी राह छोड़ने की अपील करवाते हैं.

कश्मीर घाटी की आतंकी भर्ती में इस साल 50% से ज्यादा कमी आई है....

कश्मीर: घाटी में सुरक्षा बलों के लिए वर्ष 2020 सबसे सफल वर्षों में से एक रहा है. इस साल सुरक्षाबलों ने घाटी में 160 से अधिक आतंकी मार गिराए. वही आतंकवादी संगठनों में भर्ती होने वाले युवाओं के आंकड़े में  50 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज हुई है. सुरक्षा बलों का कहना है कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष नए कश्मीरी युवाओं को आतंकी राह पर आगे बढ़ाने की पाकिस्तान की ज्यादातर कोशिशें नाकाम कर दी गईं.  

कारगर रही काउंसलिंग

यह नतीजे सिर्फ ऑपरेशन ऑल आउट ही नहीं बल्कि सुरक्षा बलों के दिन-रात की मेहनत का नतीजा है. कश्मीर के भटके युवाओं को देश की मुख्य धारा में वापस लाया जा सके, चाहे वो आतंकी संगठनों में शामिल हो चुके हों या फिर आतंकी राह में कदम बढ़ाने की फिराक में हैं. ऐसे युवाओं के साथ उनके दोस्तों और परिजनों की भी काउंसलिंग की जा रही है.

दर्जनों युवाओं को काउंसलिंग के बाद सुरक्षाबल इस साल आतंकवाद के रास्ते से वापस लाए और उन्हे उनके माता-पिता को सौंप दिया गया. एनकाउंटर साइट पर भी, सुरक्षा बल स्थानीय आतंकवादियों को पहले सरेंडर के लिए कहते हैं और अक्सर ये तकनीकि कामयाब हो जाती है. 

जम्मू कश्मीर पुलिस का आंकलन

डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक '2020 में हम 16 लड़कों को वापिस लाने में कामयाब रहे हैं जो आतंकवादी बन गए थे. इस काम में सेना और जम्मू कश्मीर पुलिस बढ़-चढ़ कर भूमिका निभा रही है. जब भी कोई युवा लापता होता है, तो परिवार वाले पुलिस के पास रिपोर्ट दर्ज कराते हैं. फिर सुरक्षा एजेंसियां ​​उन्हें वापस लाने के लिए उनकी पड़ताल करतीं हैं. अगर ये पहले ही आतंकी संगठन में शामिल हो गए हैं, तो फिर सुरक्षाबल इनके परिवारों से संपर्क करके उनसे आतंकी राह छोड़ने की अपील करवाते हैं.

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एसएसपी गांदरबल खलील पोसवाल का मानना है कि ' कश्मीरी युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए प्रेरित होकर आतंकी समूह में दाखिल करने की साजिश होती है. हाल ही में युवाओं के एक समूह के बारे में हिजबुल मुजाहिद्दीन (HM) का इनपुट मिला, इसके बाद फौरन कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया.'

सालभर में, बहुत सारे वीडियो सोशल नेटवर्किंग पर वायरल हुए, जहां लापता हुए युवाओं के परिवार अपील करते दिखे. जो अपने बच्चों से आतंकी रास्ता छोड़कर वापस लौटने की विनती कर रहे थे. और इस माध्यम ने भी प्रभावी भूमिका निभाई है. 

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