सुप्रीम कोर्ट का UP से सवाल: आप कृष्ण के नाम पर हजारों पेड़ कैसे गिरा सकते हैं?

1 month ago 25
Supreme Court

विकास के नाम पर पर्यावरण से होने वाले खिलवाड़ पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में प्रस्तावित कृष्ण गोवर्धन रोड प्रोजेक्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भगवान के नाम पर पेड़ों को नहीं गिराया जा सकता.

नई दिल्ली: विकास के नाम पर पर्यावरण से होने वाले खिलवाड़ पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मथुरा में प्रस्तावित कृष्ण गोवर्धन रोड प्रोजेक्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि भगवान के नाम पर पेड़ों को नहीं गिराया जा सकता. मुख्य न्यायाधीश (CJI) एसए बोबडे ने यूपी सरकार से कहा कि आप कृष्ण के नाम पर हजारों पेड़ नहीं गिरा सकते हैं. दरअसल, सड़क के लिए हजारों पेड़ काटने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की गई है. जिस पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने यह टिप्पणी की.

इससे तो Speed ही कम होगी 

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे (Sharad Arvind Bobde) ने कहा कि सड़कें पेड़ों के पास से घूमकर क्यों नहीं जा सकती हैं? इससे कोई नुकसान तो नहीं है, केवल गति ही कम होगी और अगर स्पीड कम होगी तो इससे दुर्घटनाएं भी कम होंगी. इससे लोगों की जान बचेगी और यह हर मामले में ज्यादा सुरक्षित रहेगा. सीजेआई ने यूपी सरकार से कहा, ‘जीवित पेड़ों का मूल्यांकन केवल लकड़ी के मूल्य के आधार पर नहीं किया जा सकता है. पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, इसे भी मूल्यांकन में शामिल किया जाना चाहिए’. 

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चीफ जस्टिस ने कहा कि यह तो साफ है कि सड़क के रास्ते में आने वाले पेड़ों को अगर नहीं काटा गया तो सड़क सीधी नहीं बनेगी और गाड़ियों की रफ़्तार पर असर पड़ेगा, लेकिन यह हानिकारक तो नहीं है. सुनवाई के दौरान PWD विभाग ने भरोसा दिलाया है कि वो काटे गए पेड़ों की जगह दूसरे स्थान पर पौधारोपण करके नुकसान की भरपाई करेगा और इस तरह पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा. इस पर CJI ने कहा कि अदालत केवल आंकड़ों वाले हर्जाने को स्वीकार नहीं कर सकती, क्योंकि सरकार और विभाग दोनों ने ही पेड़ों की प्रकृति के बारे में नहीं बताया है कि ये झाड़ियां हैं या फिर बड़े पेड़.

आपने उम्र भी नहीं बताई?

 

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि पेड़ों की उम्र के बारे में भी जानकारी नहीं दी गई है. यदि कोई 100 साल की उम्र वाला पेड़ काटा जाता है, तो स्वाभाविक तौर पर दूसरी जगह पौधारोपण करके उसकी भरपाई नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट मामले में अब चार हफ्ते बाद सुनवाई करेगा. गौरतलब है कि विकास के नाम पर पेड़ों की कटाई आम है. कई शहरों में मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते हजारों पेड़ों को काटा जा रहा है. इसमें वे पेड़ भी शामिल हैं, जो सालों से लोगों को छाया दे रहे थे. बता दें कि मथुरा में कृष्ण-गोवर्धन रोड परियोजना के लिए 2940 वृक्षों को काटने की अनुमति देने का अनुरोध किया गया है.

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